
काकोरी-पारा-दुबग्गा में सीलिंग कार्रवाई के बाद भी खड़ी हो रहीं इमारतें, कार्रवाई की प्रभावशीलता पर उठे सवाल
लखनऊ। काकोरी, पारा और दुबग्गा क्षेत्र में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माणाधीन भवनों पर LDA की टीम पहुंचकर सीलिंग की कार्रवाई करती है, लेकिन इसके बावजूद कई जगह निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहता है और देखते ही देखते इमारतें तैयार हो जाती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी भवन को नियमानुसार सील किया गया है, तो उसके बाद निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हो जाता है? क्या सीलिंग के बाद मौके पर नियमित निगरानी होती है या फिर कार्रवाई महज कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाती है?
पहले सीलिंग, फिर निर्माण कैसे?
क्षेत्र में चर्चा है कि जैसे ही किसी निर्माणाधीन भवन पर LDA अधिकारियों की नजर पड़ती है, वहां सीलिंग की कार्रवाई कर दी जाती है। कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए निर्माण रुकता दिखाई देता है, लेकिन आरोप है कि इसके बाद दोबारा काम शुरू हो जाता है।
यदि यह आरोप सही हैं, तो सवाल केवल अवैध निर्माण का नहीं बल्कि सीलिंग आदेश के पालन और उसकी निगरानी व्यवस्था का भी है।
‘बड़े साहब’ की कार्रवाई पर ‘छोटे साहब’ की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि पहले वरिष्ठ अधिकारी स्तर से कार्रवाई होती है और बाद में निचले स्तर पर मामले को लेकर अलग-अलग तरह की गतिविधियां दिखाई देती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में LDA के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि सील किए गए भवनों की सूची बनाकर उनका दोबारा निरीक्षण क्यों नहीं कराया जाता? यदि सील तोड़कर निर्माण किया गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती?
जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा खेल
काकोरी-पारा-दुबग्गा क्षेत्र में पिछले कुछ समय में तेजी से हो रहे निर्माण को देखते हुए सील किए गए भवनों का भौतिक सत्यापन कराया जाना जरूरी बताया जा रहा है। यदि किसी भवन पर सीलिंग के बावजूद निर्माण जारी मिला है तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि सील कब हुई, उसके बाद कितनी बार निरीक्षण हुआ और निर्माण दोबारा कैसे शुरू हुआ।
अब देखने वाली बात यह होगी कि LDA इस पूरे मामले में सीलिंग के बाद निर्माण जारी रहने की शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करता है या फिर मामला फाइलों तक ही सीमित रहता है।