सूबे की आवाज : संवाददाता दीपिका 
आवाज कागजों पर हर ‘घर जल ‘जमीन पर जनता बेहाल
लखनऊ उत्तर प्रदेश, शहरी विकास और स्वच्छ पेयजल के दावों के बीच जलकल विभाग की कार्य प्रणाली इस समय पूरी तरह पटरी पर उतर चुकी हैl करोड़ों रुपए के बजट और बड़ी-बड़ी योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि जनता बूंद -बूंद पानी और नारकिय सीवर व्यवस्था से जूझ रही हैl विभाग के घोर लापरवाही अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के गठ जोड़ ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया हैl जलकल विभाग की वे पांच बड़ी कड़वी सच्चाइयां जिन्हें दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है l
(1) स्लो प्वाइजन बनता जा रहा है सप्लाई का पानी, शहरी इलाकों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि घरों के नलों से शुद्ध जल की जगह बदबूदार पीला पानी और सीवर मिश्रित पानी आ रहा हैl मुख्य वजह यह है कि दशको पुरानी वाटर पाइप लाइन कई जगह से टूट चुकी है, और सीवर लाइनों के समांनातर गुजरने के कारण दोनों का पानी आपस में मिल रहा है पानी की टैंकियो की सफाई सालों से सिर्फ कागजों पर ही हो रही हैl जिससे लोग पीलिया ,टाइफाइड, पेट जैसी अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे हैंl
(2) नरक बनती कालोनियां सीवर सिस्टम पूरी तरह ध्वस्तl स्मार्ट सिटी शहर आधी आबादी से ज्यादा (उफ़नते) सीवर और जल भराव के बीच रहने को मजबूर है l सीवर ब्लाक होने की शिकायतो पर विभाग हफ्तों तक सुध नहीं लेता हैl
(3) बिना पानी के आ रहे हैं हजारों रुपए का बिल l उपभोक्ताओं के लिए जलकल विभाग का बिलिंग सिस्टम एक बड़ा सिर दर्द बन चुका है जिन घरों में, माहिनो से पानी की एक बूंद नहीं आई है मीटर बंद पड़े हैं वहां भी विभाग हजारों रुपए के मनमाने बिल भेज रहा हैl इसके विपरीत रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बड़े बकाये दारो से साठ गांठ कर उनके बिलो को रफा दफा कर दिया जाता है,आम आदमी सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काट थक चुका हैl
(4) हेल्पलाइन नंबर / शिकायतें पत्रों मैं सिर्फ दिखावाl
विभाग ने शिकायत दर्ज करने के लिए टोल फ्री नंबर ऑनलाइन पोर्टल तो बना दिए लेकिन उन पर आने वाली शिकायतों का डिपोजल रेट बेहद खराब है, आइ जी आर एस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को नीचे के अधिकारी बिना काम किये ही निस्तारित देते हैंl ग्राउंड जीरो पर जनता की सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी दफ्तर में नहीं मिलते है ,जिससे आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सके अपनी समस्याएं बता सकेl
(5) मरम्मत के नाम पर लीपापोती l
हर साल पाइप लाइन मरम्मत नई मोटर की खरीद और लीकेज ठीक करने के नाम पर करोड़ों रुपए का टेंडर जारी होता है लेकिन लीकेज ठीक करने के नाम पर सड़क को खोद कर माहिनो छोड़ दिया जाता है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं l घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण कुछ ही दिनों बाद पाइपलाइन फट जाती हैl
(6) जनता की आवाज –
हम टैक्स भी दे रहे हैं और पानी का बिल भी इसके बावजूद पानी खरीदने को मजबूर है l
पत्रकार की कलम से _ जलकल विभाग की दुर्दशा केवल संसाधनों की कमी नहीं बल्कि जवाब देही है की पूरी तरह खत्म होने का नतीजा है जब तक वाताअनुकूलित कमरों में बैठे बड़े अधिकारी जमीनी निरीक्षण नहीं करेंगे और ठेकेदारों के भ्रष्टाचार पर नकल नहीं कसी जाएगी तब तक जनता यूं ही बूंद बूंद पानी से और गंदगी से जूझते रहेंगे, सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेकर एक उच्च स्तरीय जांच बैठानी चाहिएl
लखनऊ उत्तर प्रदेश, शहरी विकास और स्वच्छ पेयजल के दावों के बीच जलकल विभाग की कार्य प्रणाली इस समय पूरी तरह पटरी पर उतर चुकी हैl करोड़ों रुपए के बजट और बड़ी-बड़ी योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि जनता बूंद -बूंद पानी और नारकिय सीवर व्यवस्था से जूझ रही हैl विभाग के घोर लापरवाही अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के गठ जोड़ ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया हैl जलकल विभाग की वे पांच बड़ी कड़वी सच्चाइयां जिन्हें दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है l
(1) स्लो प्वाइजन बनता जा रहा है सप्लाई का पानी, शहरी इलाकों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि घरों के नलों से शुद्ध जल की जगह बदबूदार पीला पानी और सीवर मिश्रित पानी आ रहा हैl मुख्य वजह यह है कि दशको पुरानी वाटर पाइप लाइन कई जगह से टूट चुकी है, और सीवर लाइनों के समांनातर गुजरने के कारण दोनों का पानी आपस में मिल रहा है पानी की टैंकियो की सफाई सालों से सिर्फ कागजों पर ही हो रही हैl जिससे लोग पीलिया ,टाइफाइड, पेट जैसी अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे हैंl
(2) नरक बनती कालोनियां सीवर सिस्टम पूरी तरह ध्वस्तl स्मार्ट सिटी शहर आधी आबादी से ज्यादा (उफ़नते) सीवर और जल भराव के बीच रहने को मजबूर है l सीवर ब्लाक होने की शिकायतो पर विभाग हफ्तों तक सुध नहीं लेता हैl
(3) बिना पानी के आ रहे हैं हजारों रुपए का बिल l उपभोक्ताओं के लिए जलकल विभाग का बिलिंग सिस्टम एक बड़ा सिर दर्द बन चुका है जिन घरों में, माहिनो से पानी की एक बूंद नहीं आई पर वहा मीटर बंद पड़े हैं वहां भी विभाग हजारों रुपए के मनमाने बिल भेज रहा हैl इसके विपरीत रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बड़े बकाये दारो से साठ गांठ कर उनके बिलो को रफा दफा कर दिया जाता है,आम आदमी सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काट थक चुका हैl
(4) हेल्पलाइन नंबर / शिकायतें पत्रों मैं सिर्फ दिखावाl
विभाग ने शिकायत दर्ज करने के लिए टोल फ्री नंबर ऑनलाइन पोर्टल तो बना दिए लेकिन उन पर आने वाली शिकायतों का डिपोजल रेट बेहद खराब है, आइ जी आर एस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को नीचे के अधिकारी बिना काम किये ही निस्तारित देते हैंl ग्राउंड जीरो पर जनता की सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी दफ्तर में नहीं मिलते है ,जिससे आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सके अपनी समस्याएं बता सकेl
(5) मरम्मत के नाम पर लीपापोती l
हर साल पाइप लाइन मरम्मत नई मोटर की खरीद और लीकेज ठीक करने के नाम पर करोड़ों रुपए का टेंडर जारी होता है लेकिन लीकेज ठीक करने के नाम पर सड़क को खोद कर माहिनो छोड़ दिया जाता है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं l घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण कुछ ही दिनों बाद पाइपलाइन फट जाती हैl
(6) जनता की आवाज l
हम टैक्स भी दे रहे हैं और पानी का बिल भी इसके बावजूद पानी खरीदने को मजबूर है l
पत्रकार की कलम से _ जलकल विभाग की दुर्दशा केवल संसाधनों की कमी नहीं बल्कि जवाब देही है की पूरी तरह खत्म होने का नतीजा है जब तक वाता अनुकूलित कमरों में बैठे बड़े अधिकारी जमीनी निरीक्षण नहीं करेंगे और ठेकेदारों के भ्रष्टाचार पर नकल नहीं कसी जाएगी तब तक जनता यूं ही बूंद बूंद पानी से और गंदगी से जूझते रहेंगे, सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेकर एक उच्च स्तरीय जांच बैठानी चाहिएl