शहर की सड़कों पर सुबह और शाम लगने वाला भीषण ट्रैफिक जाम अब सिर्फ एक दैनिक असुविधा नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे शहर की रफ्तार और नागरिकों के मानसिक सुकून को निकल रहा हैl मुख्य बाज़ार मार्ग से लेकर रेलवे रोड तक गाड़ियों की लंबी कतार और घोंसला बनाते वाहन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि शहर का यातायात ढांचा पूरी तरह चरमारा आ चुका है l
इस समस्या के दो प्रमुख कारण साफ नजर आते हैंl
(1) अनियंत्रित अतिक्रमण
(2) पुलिस प्रशासन की उदासीनता
दुकानदारों द्वारा फुटपाथ पर सामान फैलाना और सड़कों के किनारे अवैध पार्किंग होना , आम बात बन चुकी है जो फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बने थे, उन पर या तो रेहड़ी पट्टी वालों का कब्जा है , या फिर गाड़ियां खड़ी है l
इसके चलते पैदल यात्रियों को मजबूरन मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है, जो न केवल ट्रैफिक को धीमा करता है बल्कि हादसों को भी न्योता देता है l
दूसरा पहल: नगर निगम और यातायात पुलिस की कार्यशैली का है , समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर खानापूर्ति तो कर दी जाती है लेकिन अभियान खत्म होते ही स्थिति जस की तस हो जाती हैl
स्थाई समाधान की दिशा ना तो ठोस नीति बनाई जा रही है और ना ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो रही हैl शहर की बढ़ती आबादी और गाड़ियों की संख्या को देखते हुए पार्किंग स्थलों का निर्माण ऑटो ई रिक्शा के लिए रूट तय करना बेहद जरूरी हो चुका था, लेकिन यह योजनाएं केवल फाइलों में धूल चाट रही हैं l प्रशासन को समझना होगा कि सिर्फ घोषणाएं करने से सड़के चौड़ी नहीं होगी, यदि शहर को इस रोजाना के इस इस स्मांग और शोर से बचाना है तो, कड़े कदम उठाने ही होंगे l
नगर निगम को तुरंत अवैध अतिक्रमण के खिलाफ निरंतर और निष्पक्ष अभियान चलाना होगा साथ ही यातायात पुलिस को मुख्य चौराहे पर न केवल चालान काटने के बजाय ट्रैफिक सुचारू रूप से संचालन पर ध्यान देना होगाl
शहर केवल बहुमंजिला इमारत से स्मार्ट नहीं बनता वहां की बुनियादी सुविधाओं और जीवन की सुगमता और बेहतर बनाती है l
अब समय आ गया है की जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागे और नागरिकों को इस रोज-रोज के नारकिय जान सेकी जान से मुक्ति मुक्ति दिलाये l